“कडसरी मिश्र का ‘लूट कांड’: विकास निगल गया भू-माफिया बाप और बहरूपिया बेटा; गरीबों के हक पर चलाया भ्रष्टाचार का बुलडोजर!”
"सरकारी गढ़े पर 'पाप का महल': क्या राम उजागिर के अवैध साम्राज्य पर चलेगा बाबा का हंटर? जांच में उजागर हुआ प्रधानी का काला सच!"
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
दिनांक: 18 अप्रैल, 2026
स्थान: कुदरहा, बस्ती।। कडसरी मिश्र में ‘भ्रष्टाचार का नरपिशाच’: बाप-बेटे की जोड़ी ने सरकारी खजाने की बोटी-बोटी नोची! गढ़े की जमीन पर खड़ा है राम उजागिर का ‘पाप महल’; बहरूपिये रमेश ने मनरेगा के पेट में उतारा मौत का खंजर।
- “भ्रष्टाचार की ‘सुरसा’ बना चौधरी परिवार: मनरेगा से लेकर शौचालय तक चट कर गया बहरूपिया कुनबा; रिकवरी या जेल?”
- “बाप नम्बरी तो बेटा दस नम्बरी: कडसरी मिश्र में ‘लूट की जुगलबंदी’, कागजों में विकास और जमीन पर सिर्फ विनाश!”
- “बस्ती का सबसे बड़ा खुलासा: पूर्व प्रधान और सचिव की जुगलबंदी ने ग्राम पंचायत को बनाया अपनी ‘जागीर’, अब होगा पाई-पाई का हिसाब!”
बस्ती/कुदरहा:: लोकतंत्र के मंदिर (ग्राम पंचायत) को लूट का चारागाह कैसे बनाया जाता है, इसका जीवंत और घिनौना प्रमाण कुदरहा विकास खंड की ग्राम पंचायत कडसरी मिश्र में देखने को मिल रहा है। यहाँ पूर्व प्रधान राम उजागिर चौधरी और उसके शातिर बेटे रमेश चौधरी ने मिलकर भ्रष्टाचार का ऐसा ‘नंगा नाच’ किया है कि विकास खुद शर्म से पानी-पानी हो जाए। इन दोनों ने मिलकर गाँव की तरक्की को अपनी हवस की भेंट चढ़ा दिया है।
राम उजागिर का ‘जमीन कब्जा’ उद्योग: सरकारी गढ़े पर तान दिया अवैध साम्राज्य
पूर्व प्रधान राम उजागिर ने प्रधानी को सेवा नहीं, बल्कि ‘जमीन हड़पो योजना’ समझ लिया। जिस गढ़े की जमीन पर ग्रामीणों का हक था, उसे सरेआम पाटकर राम उजागिर ने अपने रसूख के दम पर एक ‘अवैध भ्रष्टाचार महल’ खड़ा कर लिया है। यह आलीशान इमारत सिर्फ ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि गरीबों के हक को कुचलकर बनाई गई है।
सवाल यह है: क्या प्रशासन का बुलडोजर सिर्फ गरीबों की झोपड़ियों के लिए है? इस भू-माफिया के अवैध किले पर बाबा का हंटर कब चलेगा?
मनरेगा की ‘कसाई’ बनी पारिवारिक चौकड़ी
भ्रष्टाचार की इस ‘मधुमक्खी के छत्ते’ में पूरा परिवार ही शामिल है। बेटा रमेश चौधरी (बहरूपिया), भाई उमेश और रमेश की पत्नी ने मिलकर मनरेगा (MGNREGA) के बजट को इस कदर डकारा है जैसे वह उनकी निजी बपौती हो।
- चाचा-भतीजा सिंडिकेट: चाचा कपिल देव और भतीजे (रोजगार सेवक) ने मिलकर कागजी घोड़े दौड़ाए।
- फर्जी मस्टररोल: मजदूरों के पसीने की बूंदों को इन ‘सफेदपोश डकैतों’ ने अपनी तिजोरी में बंद कर लिया।
शौचालय का पैसा भी डकार गए ‘गंदगी के सौदागर’
हैरानी की बात तो यह है कि इन लुटेरों ने गांव की बहू-बेटियों की मर्यादा तक को नहीं बख्शा। स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालयों का पैसा ये ‘बाप-बेटे’ डकार गए। गांव की मर्यादा को गटर में फेंकने वाले इन भ्रष्टाचारियों की आत्मा शायद मर चुकी है। ‘बाप नम्बरी तो बेटा दस नम्बरी’ वाली कहावत यहाँ अक्षरशः सिद्ध होती है।
जांच रिपोर्ट में ‘नंगे’ हुए घोटालेबाज: अब सिर्फ जेल ही मंजिल!
जांच टीम की रिपोर्ट ने इस गैंग का कच्चा चिट्ठा खोलकर रख दिया है। राम उजागिर, रमेश, कपिल देव, रोजगार सेवक और सचिव—यह पूरी मंडली घोटाले की मुख्य सूत्रधार पाई गई है।
जनता की आवाज:
- रिकवरी: लूटे गए एक-एक पैसे की वसूली इनके घर की कुर्की करके की जाए।
- बुलडोजर कार्रवाई: सरकारी जमीन पर बने अवैध ‘पाप महल’ को तत्काल जमींदोज किया जाए।
- जेल: इन भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे भेजकर एक नजीर पेश की जाए।
















